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                हम पानी की बात करते-करते चौथे वर्ष में प्रवेश कर रहे हैं। अन्तर्राष्ट्रीय जल संरक्षण दिवस पर 22 मार्च को हमने ‘शिवम् पूर्णा’ का घोषणा पत्र भरा था, जो शिव ‘गंगा’ को शीश पर धारण करते है इसलिए गंगाधर कहलाए, उन्हीं ‘शिव’ के मुकुट चन्द्रमा की बेटी है ‘पूर्णा’ जो जग कल्याणकारी होने के कारण ‘शिवम् पूर्णा’ कहलाई। उसी पूर्णा नगरी (भैसदेही) में प्रदेश के मुखिया माननीय शिवराज सिंह चौहान मुख्यमंत्री म.प्र. शासन ने ‘पूर्णा’ नदी पर कुछ महत्वपूर्ण उपचारात्मक योजनाएँ संचालित करवाई हैं, जिस योजना के अन्तर्गत चालीस किलोमीटर में सूख गई नदी पुन: जीवित हो सके। हमारे जल अभियान में ‘पूर्णा’ भारत की सभी नदियों का प्रतीक हैं, यह संयोग ही है कि ‘शिवम् पूर्णा’ के प्रथम अंक का विमोचन माननीय मुख्यमंत्री के करकमलो द्वारा संपन्न हुआ। भारत के मध्य बिन्दु बैतूल जिले से पश्चिम वाहिनी नदी ताप्ती की प्रमुख सहायक नदी है ‘पूर्णा’। ‘शिवम् पूर्णा’  देश भर की नदियों की (जल की) प्रतिनिधि पत्रिका है। जिसमें हम सिंधु से लेकर साबरमती, गंगा से लेकर महानदी, नर्मदा से लेकर ताप्ती, गोमती से लेकर कावेरी, ब्रह्मपुत्र से लेकर दामोदर तक नदी संदर्भ के सभी प्रश्नों को और उनके समाधानों के लिए आतुर है, तत्पर है।

हम जल के बल पर ही पहँुचे हैं जलते प्रश्नों के तल पर, जिन्हें हम नहीं टाल सकेंगे कल पर। जब नदियों का दम घुट रहा हो, तब उनके प्रदूषित होने के मुख्य कारणों को जानना होगा, तभी हम समाधान के द्वार तक पहुँचेगे। बहुतेरी नदियों का जल प्रदूषित होने का अर्थ ही यह है कि हमारी जीवन प्रणाली (विशेष रूप से नगरीय सीवेज-व्यवस्था) का उचित उपचारात्मक प्रबन्धन न होना। जब नदियों में सीधे मल-जल मिल रहा हो तब हल कैसे निकलेगा। कल-कारखानों का अपशिष्ट (कचरा) भी नदियों में, रही सही प्रदूषण की कमी को दूर करता है, आशय यह है कि यमुना जैसी कई नदियाँ कुछ विशेष भाग से अपना अस्तित्त्व खो चुकी है, इन सब के विपरीत अच्छे परिणामों के लिए दृढ़ इच्छा शक्ति की आवश्यकता है। गुजरात की साबरमती नदी इसका एक जीवंत उदाहरण है, वर्षों से सूखी पड़ी नदी साबरमती आज जल से लबालब है, नौ साल में 1150 करोड़ रूपएं खर्च कर सूखी नदी-सदा नीरा नदी में बदल गई है। नदियों को पावन और मनभावन बनाए रखने के लिए नदियों में सीवर(मल-जल) का प्रबल प्रवाह सख्ती से रोका जाना चाहिए, तभी नदियाँ आचमन के योग्य बनी रहेगी। साबरमती नदी को पुन: सदानीरा बनाए रखने में उक्त निर्णय लिए गए, साबरमती के दोनों किनारों पर समान्तर एक बड़ी पाईप लाइन के जरिए सीवेज को आधुनिक ट्रीटमेंट प्लांट से जोड़ा गया है यही प्रणाली हमें अन्य बड़ी नदियों के लिए अपनानी होगी। इसके साथ जल की मितव्ययिता संतुलित और सम्यक वितरण जल की सार्थकता है। हम इस निष्कर्ष पर पहँुचे है जिस तरह साबरमती को नर्मदा नदी की लिंक नहर से जोड़ा गया है वह अन्य नदियों के लिए एक अनुकरणीय आदर्श हैं।

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